
अपनी नीतियों से बालक चंद्रगुप्त मौर्य को सम्राट बनाने वाले चाणक्य ने जीवन को सुखमय बनाने के लिए कई बातें कही हैं. उनकी ये नीतियां खुशहाल जीवन की राह दिखाती हैं. नीति ग्रंथ चाणक्य नीति में आचार्य चाणक्य जीवन को सरल तरीके से जीने और सफलता को प्राप्त करने के रास्तों का उल्लेख करते हैं. अपने ग्रंथ में उन्होंने उन चार अवस्थाओं का भी उल्लेख किया है जो मनुष्य के लिए विष के समान हैं.
> चाणक्य कहते हैं मनुष्य को स्वादिष्ट भोजन करना चाहिए. जीने के लिए भोजन आवश्यक है, लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि खाया जाने वाला भोजन पच जाए. अगर व्यक्ति का स्वास्थ्य उस भोजन को पचाने की स्थिति में न हो तो वो भोजन उस व्यक्ति के लिए विष समान है.
> मनुष्य तभी सुखद जीवन जी सकता है जब उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो. गरीब, दरिद्र व्यक्ति को शादी और घर जैसे भार विश समान लगते हैं. आचार्य चाणक्य के मुताबिक इस स्थिति में सुधार के प्रयास करते रहने चाहिए.
> बुढ़ापा समाज को सही दिखाने के काम आता है क्योंकि व्यक्ति के पास अपार अनुभव होता है. लेकिन जब वृद्ध व्यक्ति बुढ़ापे की अवस्था में दान, पुण्य, धर्म व समाज को छोड़कर प्रेम प्रसंग में फंसता है तो यह अवस्था उसके लिए विष समान बन जाती है, क्योंकि स्वास्थ्य, धन और सम्मान का नाश होता है.
चाणक्य के मुताबिक इन 4 कामों के बाद मनुष्य को हर हाल में करना चाहिए स्नान
> चाणक्य कहते हैं कि ज्ञान का दोहराव जरूरी है. उसके अभ्यास से व्यक्ति के जीवन में निखार आता है, वो पारंगत बनता है. लेकिन अभ्यास न करने पर वो ज्ञान विष समान हो जाता है.